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Friday, 13 February 2015

एक मुट्ठी आसमान चाहिए




यहां सफर कैसा भी हो,
सभी को रास्ता एक, आसान चाहिए।

यहां मंज़िल कैसी भी हो,
लोगो को तो बस एक, पहचान चाहिए।

सोने वाले सपनों से थक कर सो गए,
अब हर किसी को महल एक, आलिशान चाहिए।

कोशिश तो करते हैं सब अपने लिए जीने की,
पर यहां जीने के लिए भी, एक मुट्ठी आसमान चाहिए।


Monday, 9 February 2015

रंग बदलती दुनियाँ देखी, मैंने खुद को भी रंग बदलते देखा..




टूट कर बिखरते जज़्बात देखे, तो अपने अरमां को भी संवरते देखा..
रंग बदलती दुनियाँ देखी, मैंने खुद को भी रंग बदलते देखा..


खानाबदोशों को ग़र रुकते देख़ा, तो गरीबोँ को दर-दर भी भटकते देखा..
रंग बदलती दुनियाँ देखी, मैंने खुद को भी रंग बदलते देखा..


देखा अपनों को भी कठिनाई में, तो अजनबी को अपने पास भी हँसते देखा..
रंग बदलती दुनियाँ देखी, मैंने खुद को भी रंग बदलते देखा..


ईमान के पुजारी भी मिले, तो पैसों की ताकत से ज़मीर भी गिरते देखा..
रंग बदलती दुनियाँ देखी, मैंने खुद को भी रंग बदलते देखा..


कभी असंभव भी संभव सा हुआ, तो कभी ज़रूरी काम भी टलते देखा..
रंग बदलती दुनियाँ देखी, मैंने खुद को भी रंग बदलते देखा..


अमर-प्रेम की दास्तां देखी, तो रिश्तें-नातें प्यार की बातें, इन्हे भी खूब सिसकते देखा..
रंग बदलती दुनियाँ देखी, मैंने खुद को भी रंग बदलते देखा..


कभी मिसाल बना गैरो का अपनापन, तो कभी अपनों को भी छलते देखा..
रंग बदलती दुनियाँ देखी, मैंने खुद को भी रंग बदलते देखा..


Saturday, 17 January 2015

यही दर्द मुझे अब जीने की वजह देगा




न जाने क्यूँ ये जिंदगी आज, उन चंद ख्वाहिशों की मोहताज है.
और, न जाने क्यूँ आज इन खामोशीयों मे भी आवाज़ है।
इस अंतरात्मा से बार-बार आती एक आवाज़ है,
जो हर पल दे रही एक अज़ाब है
 ये अज़ाब ही है, जो बुन रहा एक ख्वाब आज फिर,
उस ख्वाब का ही पंछी हूँ मैं, 
जो हो रहा है मेरे साथ, उसका साक्षी हूँ मैं
ये वही हूँ मैं,
जो उस दर्द का गुनहगार है,
पर हर उस खुशी का हकदार है
जो अब तक उससे जुदा है,
जुदा है तब तक,
जब तक खुद से किया ये वादा पूरा ना हो,
जब तक ये जागती आँखों से देखा ख्वाब पूरा ना हो,
जब तक इस नादान परिंदे की उड़ान पूरी ना हो।
माना ये दर्द मुझे जीने नहीं देगा,
पर मुझे पूरा विश्वास है,
 ये वक़्त आज फिर मुझे एक मौका देगा,
यही दर्द मुझे अब जीने की वजह देगा।
यही दर्द मुझे अब जीने की वजह देगा।


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