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Friday, 31 January 2014

किसी कि दुआओं ने आज फिर बचाया है




खुशियां औरों को दे कर, हमने ये इनाम कमाया है.. 
मिली जिनके दिल में जगह, उन्हें पलकों पर बिठाया है...

ये जानते हैं हम, कि वो सिर्फ एक साया है.. 
पर हमेशा उस सायें का ही पीछा करते खुद को पाया है... 

जिस ख्वाब को देख कर, कोई और ख्वाहिश ही ना रही.. 
पूरी ज़िन्दगी उसी एक ख्वाब ने रुलाया है... 

दिल में ही रह गया था, एक तमन्ना का नाम-ओ-निशाँ.. 
बस, वही मुझे फिर से अपने शहर खींच लाया है... 

हमारी आँखों का सुकून था, वो अजनबी चेहरा.. 
इसीलिए, हमने अपनी ख़ुशी से ये धोखा खाया है... 

आज दिल के उस दर्द को भी, मिला ही लिया इन लफ्ज़ो में.. 
तब कहीं जाकर, इन शब्दों में ये रंग आया है... 

सलामती का तो कोई रास्ता, था ही नहीं यारा.. 
मुझे तो किसी कि दुआओं ने आज फिर बचाया है... 
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