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Sunday, 18 August 2013

अबकी बार



बहुत लड़े हम अबकी बार,
जीवन की गहमा गहमी में आते रहे 
उतार चढ़ाव।।

किसने देखे किसने जाने
इस दुनिया के ताने बाने,
कितनी बातें कितनी शर्तें
तर्कों  पर तर्कों  की पर्तें,
भूल गए हम दोनो तो हैं एक नाव की 
दो पतवार।।

चलो काम को कल पर टालें
कुछ पल तो हम साथ बितालें,
साथ बुने जो सपने मिल कर
आओ उनको पुनः संभालें,
हाथ मिलाकर आज फिर सजालें अपने सुख
का परिवार।।

बहुत लड़े हम अबकी बार।।


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