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Friday, 24 May 2013

अगर नहीं होता



वो हम सफ़र है मगर हमज़बान नहीं होता,
ईंट पत्थर से बना घर मकान नहीं होता।।

लिखी जाती है जिगर के खून से इबारत,
स्याही से दिल का दर्द बयान नहीं होता।।

पिघल जाता उसके सीने में अगर होता दिल,
शायद वो पत्थर है, मेहरबान नहीं होता।।

जिसके अन्दर हौसले का चिराग जलता है,
वक़्त की आंधी से परेशान नहीं होता।।

वो लोग जिनको छत नहीं है मयस्सर,
क्या करते अगर ऊपर आसमान नहीं होता।।

आइना वक़्त का दिखाता है सब की सूरत,
अपनी सूरत से जुदा कोई इन्सान नहीं होता।।

लड़ना है ज़िन्दगी के मैदान में हर एक पल,
एक दो दिन में कभी इम्तिहान नहीं होता।।

Wednesday, 22 May 2013

सफ़र....




ज़िन्दगी का सफ़र कुछ अजीब सा लगा,
जो अपना मिला वो कुछ करीब सा लगा,
हमने तो अपनी खुशियाँ सबपे लुटा दीं ,
और दुसरों से उम्मीद की तो वो गरीब सा लगा।।
ना जाने लोग क्यों कतरातें हैं,
अपना कहने से शरमाते हैं,
दो दिन की तो ये ज़िन्दगी है बस,
और उसमे भी लोग घबराते हैं।।

खुश रहो और दूसरों को खुश रहने दो,
दूसरों से कहो और उन्हें भी खुद से कुछ कहने दो,
दो दिन के लिए आये हो अच्छे से जी लो,
इन्सान हो तो खुद को इन्सान ही रहने दो।।
दुनिया में हर चीज़ यूँही नहीं मिलती,
कोई वजह ना हो तो ये हवा भी नहीं चलती,
सफ़र तो उस नदी ने भी तय किया था,
नहीं करती तो वो कभी सागर से नहीं मिलती।।

इन्सान हो तो दूसरों के लिए जीना सीखो,
मुश्कील पड़े तो उससे निकलना सीखो,
यूँ तो एक जानवर भी अपने बच्चे को बचाता है,
फिर तुम भी जरुरत पड़े तो ज़हर का घूँट पीना सीखो।।
आज तुम करोगे ,कल तुम्हारे लिए भगवान करेगा,
एक ख़ुशी तुम दो और वो तुम पर सौ ख़ुशी मेहरबान करेगा,
इन्सान से फिर तुम फ़रिश्ता बन जाओगे,
और हर शख्स तुम्हे भगवान का दूजा नाम कहेगा।।

इतनी ख़ुशी दे दो की कभी कमी न पड़े,
सब साथ रहें और कम ये ज़मी ना पड़े,
फिर तो जीने का मजा ही अलग होगा,
और साथ तुम्हारे हमेशा भगवान भी होगा।।

Monday, 20 May 2013

जो भी किया, किया है हमने




वक़्त की रेत पर इन उँगलियों को, चलाया है हमने,
ख्वाबो के नगर में एक घरोंदा, बनाया है हम ने।।

आंसुओं के दरिया में दिल को, बहाया है हमने,
और इस तरह से दर्द का रिश्ता, निभाया है हम ने।।

दुश्मनी का हर निशान दिल से, मिटाया है हमने,
जिसने हमको मिटाया उसे ही, बनाया है हम ने।।

मोहब्बत के सफ़र में लिया था हमने अनोखा क़र्ज़,
किसी ने माँगा नहीं फिर भी, चुकाया है हम ने।।

दुश्मनी में भी निभाई है दोस्ती हमने "सुमीत"
शीशमहल में रह कर भी सबको पत्थर, थमाया है हम ने।।


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