हमें इ-मेल द्वारा फोल्लोव करें! और हज़ारो लोगो की तरह आप भी इस ब्लॉग को सीधे इ-मेल द्वारा पढ़े!

Thursday, 31 May 2012

ख़ास दोस्त के लिये…




तू कभी बिछड़ा नहीं, और तू मिला भी नहीं..
पर मुझे तुझसे कोई शिकवा नहीं, ग़िला भी नहीं..

तू भले मुझसे ख़फ़ा है और तू दूर भी है..
मगर तुझसे ऐ दोस्त दिल को फ़ासला भी नहीं..

मै कैसे दिखलाऊं तुझको दिल की सच्चाई..
एक अरसे से तू मुझसे गले मिला भी नहीं..

वो एक वक़्त था जब दिल से दिल मिले थे यहाँ..
ये एक वक़्त है बातों का सिलसिला भी नहीं..

तू मुझे कुछ समझ, मुझको तो तुझसे प्यार है दोस्त..
तुझ सा कोई ढ़ूंढ़ा नहीं, मिला भी नहीं..

मुझे पता है मुझ में लाख कमी है शायद..
ये बेरुख़ी मगर दोस्ती का सिला भी नहीं..

कभी कभी मुझे लगता है भूल जाऊं तुझे..
मगर ये सच है भूलने का हौंसला भी नहीं..

तू खुश रहे ये दुआ तेरी कसम रोज़ करता हूँ..
और अपने ग़म का मुझे अब कोई ग़िला भी नहीं..

बस इक उम्मीद है तुझ को गले लगाऊं कभी..
के वो एहसास मुझे फ़िर कहीं मिला भी नहीं.. 

$

Tuesday, 22 May 2012

ये परिन्दे...


कैसी उड़ान में हैं ये ख़्वाबों के परिन्दे,
ख़्वाहिश के आसमां में अज़ाबों के परिन्दे...

शाखों पे मेरे दर्द की बैठे हैं सब के सब,
उड़ के जो आए थे तेरी यादों के परिन्दे...

कब तक रखेंगे क़ैद इन्हें आप जिस्म में,
छूटेंगे किसी रोज़ तो साँसों के परिन्दे...

छुप जाएगी वो रोशनी, हिल जाएगा वो अर्श,
ग़मे-दिल से रिहा होंगे जो आहों के परिन्दे...

टुकड़े बिखेरते चले हम दिल के हर तरफ़,
हमको दुआएं देते हैं राहों के परिन्दे...

हम  किसी के दिल को पढ़े भी तो किस तरह,
चेहरे को ढ़क रहे हैं नक़ाबों के परिन्दे...


*********

Sunday, 13 May 2012

"माँ" तू है, तो हम है...

"माँ" एक रिश्ता नहीं एक अहसास है,
भगवान मान लो या खुदा , खुद वो माँ के रूप में हमारे आस पास है..

इस एक शब्द में पूरे जीवन का सार समाया है,
जब भी रहा है दिल बैचेन मेरा , सुकून इसके आँचल तले ही पाया है ||

पलकें भीग जाती है पल में ......  "माँ" को जब भी याद किया है तन्हाई में,
जब भी पाया है खुद को मुश्किलों से घिरा, साथ दिखी है वो मुझे मेरी परछाई में ||

न जाने कौन सी मिट्टी से  "माँ" को बनाया है ऊपर वाले ने...
कि वो कभी थकती नहीं , कभी रूकती नहीं ,
उसे अपने बच्चों से कभी शिकायत नहीं होती ...
आसुओं का सैलाब है भीतर ,पर आँखों से वो कभी रोती नहीं ||

उसे टुकड़ा -टुकड़ा हो के भी , फिर से जुड़ना आता है,
अपने लिये कुछ किसी से, नहीं उससे माँगा जाता है ||

कितना भी लिखो इसके लिये कम है , सच है ये कि  "माँ" तू है, तो हम है ||


अपने जीवन की हर साँस से सिर्फ हमारे लिए खुशी माँगती माँ के लिए...
Happy Mother's Day...



मुझे चाहियें "माँ" के चेहरे पे सुकून के दो पल और उसके होटों पे मुस्कान |
करना चाहूँगा में कुछ ऐसा कि मेरे नाम से मिले मेरी माँ को पहचान | 
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
My facebook ID:Sumit Tomar