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Sunday, 14 August 2011

हमारा देश और हम (स्वतंत्रता दिवस)

...स्वतंत्रता दिवस की मेरे सभी देशवासियों को शुभकामनाएं

,आज हम दुनिया के उन ताकतवर देशो में सामिल हैं जो अनेक प्रकार की तकनीकों से संपन्न हैं
हमारा शिक्षा का स्तर और विकास दर भी सुधरी है...

बस ये आतंकवाद, भ्रष्टाचार और कुछ इसी प्रकार की और वजहों से हमारा विकास आज भी बाधित है,
पर ख़ुशी की बात यह है की इतने सब के बाद भी हमारी एकता में कोई कमी नहीं है.
हम सब आज भी साथ-साथ हैं..





हम एक दुसरे का हाथ पकड़ कर खुद भी आगे बढ़ेंगे


और


देश को भी बढ़ाएंगे!!!





जिनके बलिदान की वजह से आज हम आज़ाद हैं या महफूज़ रह रहे हैं,
उन शहीदों के लिए लिखी
जावेद अख्तर साहब की ये पंक्तियाँ
आप लोगो के बीच शेयर करना चाहूँगा..!



खामोश है जो यह वो सदा है, वो जो नहीं है वो कह रहा है , 
साथी यु तुम को मिले जीत ही जीत सदा |
बस इतना याद रहे ........ एक साथी और भी था || 


जाओ जो लौट के तुम, घर हो खुशी से भरा, 
बस इतना याद रहे ........ एक साथी और भी था ||


कल पर्वतो पे कही बरसी थी जब गोलियां , 
हम लोग थे साथ में और हौसले थे जवां | 
अब तक चट्टानों पे है अपने लहू के निशां , 
साथी मुबारक तुम्हे यह जश्न हो जीत का , 
बस इतना याद रहे ........ एक साथी और भी था || 


कल तुम से बिछडी हुयी ममता जो फ़िर से मिले , 
कल फूल चहेरा कोई जब मिल के तुम से खिले , 
पाओ तुम इतनी खुशी , मिट जाए सारे गिले, 
है प्यार जिन से तुम्हे , साथ रहे वो सदा , 
बस इतना याद रहे ........ एक साथी और भी था || 

जब अमन की बासुरी गूजे गगन के तले, 
जब दोस्ती का दिया इन सरहद पे जले , 
जब भूल के दुश्मनी लग जाए कोई गले , 
जब सारे इंसानों का एक ही हो काफिला , 
बस इतना याद रहे ........ एक साथी और भी था ||

बस इतना याद रहे ........ एक साथी और भी था ||




************






और ध्यान रखें
सिर्फ हमारा खुद का ही नहीं,
बल्कि हमारे देश का भविष्य भी हमारे हाथों में है!




ना आप हिन्दू हैं... ना मुसलमान!
आप सिर्फ़ और सिर्फ़ एक हिन्दुस्तानी हैं!!!





यहाँ पर राम बसता है, यहाँ रहमान बसता है
यहाँ हर ज़ात का, हर क़ौम का इन्सान बसता है;
जो हिन्दू हो तो क्या तुम ही फ़क़त हिन्दुस्तानी हो
यहाँ हर एक मुस्लिम दिल में हिन्दुस्तान बसता है.


अगर हो जंग नफ़रत से, मोहब्बत जीत जाती है
दिलों में हौसला कम हो तो दहशत जीत जाती है
मिलन की आस में 'गर हो शम्श की गर्मी 
तो फ़िर फ़िरऔन भी आये, सदाक़त जीत जाती है!!

वन्दे मातरम।




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