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Thursday, 23 June 2011

पथ का निर्माण

आगे बढ़ने के केवल दो ही रास्ते होते हैं!!!
पहला की हम दुसरो की देखा-देखी अपनी ज़िन्दगी के फैसले लें
और
दूसरा की लकीर के फकीर न रहकर कुछ अलग करने की ठान लें ..



जंगल में हरी-भरी पत्तियां और घास खा लेने के बाद किसी बछड़े को अपने घर यानि गाँव की गौशाला तक लौटना था ,
नन्हा बछड़ा था तो अबोध ही, वह चट्टानों , मिटटी के टीलों और ढलानों पर से उछलता-कूदता हुआ अपनी मंजिल तक पहुचने में सफल हो गया..

अगले दिन एक कुत्ते ने भी जंगल से गाँव तक पहुचने के लिए उसी रास्ते का इस्तेमाल किया,
उसके अगले दिन एक भेड़ भी उस रास्ते पर चल पढ़ी
और एक भेड़ के पीछे अनेक भेड़ चल पढ़ी,
अरे भेड़ जो ठहरी.. 

अब उस राते पर पदचाप के निशान गाँव के लोगो ने भी इसी रास्ते का इस्तेमाल करना शरू कर दिया,
ऊँची-नीची पथरीली ज़मीन पर आते-जाते समय वे रास्ते की कठिनाइयों को कोसते रहते,
लेकिन किसी  भी व्यक्ति ने सरल-सुगम पथ की खोज के लिए प्रयास नहीं किये..

समय बीतने के साथ-साथ वह पगडण्डी उस गाँव तक पहुचने का प्रमुख मार्ग बन गयी 
जिस पर बेचारे पशु बमुश्किल गाड़ी खीचते रहते..
उस कठिन पथ के स्थान पर कोई सुगम पथ होता तो लोगो को यात्रा में न केवल समय की बचत होती, बल्कि वे सुरक्षित भी रहते 

थोड़े समय बाद वह गाँव एक नगर बन चूका था और वह कठिन-सा पगडण्डी वाला रास्ता राजमार्ग में तब्दील हो गया था,
लेकिन अब भी उस पथ की समस्याओ पर चर्चा करते रहने के अलावा किसी ने कभी कुछ नहीं किया..

बूढ़ा जंगल यह सब बहुत लम्बे समय से देख रहा था 
वह बरबस मुस्कुराता और सोचता रहता की
"मनुष्य हमेशा ही सामने खुले पढ़े विकल्प को मजबूती से जकड़ लेते है और यह विचार नहीं करते की कहीं कुछ उससे बेहतर भी किया जा सकता है"

15 comments:

  1. ये प्रेरक प्रसंग कुछ अलग था, क्यों आज दुनिया जितनी आगे है वो सिर्फ एक नया करने की सोच के कारण ही है पर जितनी पीछे है वो भी सिर्फ इस वजह से है क्यूंकि इंसान भेड़ चाल चलने का आदि है
    एक अच्छी प्रस्तुति धन्यवाद्

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  2. A Really nice motivational story with An Excellent message inside it
    Really Nice

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  3. Hum bhartiyo ke liye kaafi had tak sahi bhi hai
    Nice Sharing

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  4. kaafi energy aur kuch naye rules diye hai aapki is kaahani nr
    thanks so much

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  5. "मनुष्य हमेशा ही सामने खुले पढ़े विकल्प को मजबूती से जकड़ लेते है और यह विचार नहीं करते की कहीं कुछ उससे बेहतर भी किया जा सकता है"
    behad sachchi lines hai. dhanyawad

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