हमें इ-मेल द्वारा फोल्लोव करें! और हज़ारो लोगो की तरह आप भी इस ब्लॉग को सीधे इ-मेल द्वारा पढ़े!

Thursday, 23 June 2011

वक्त





वक्त से डर के रहने मेँ समझदारी भी है..

वो कल राजा था,
आज भिखारी भी है..


औरोँ के काम आना है अच्छी बात है,
मगर
इसमेँ छिपी एहसान की बिमारी भी है..

वो धनवान है एक जवान बेटी का बाप,
एक गरीब केँ दर का वो भिखारी भी है..

बुरी नजर की आग लगाई तो खुद जलोगे,
घर मेँ बहन और बेटी तुम्हारी भी है..

वक्त की बाजी मेँ लगे हो खुद दांव पर,
तुमसे बङा "सुमीत" कोई जुआरी भी है..


$

6 comments:

  1. क्या खूब कही है, आपकी भास्कर में प्रकाशित कविता से भी अच्छी लगी ये वाली, कृपया जारी रखियेगा

    ReplyDelete
  2. yaha bhi Khade shabdo ka achha istemaal kiya hai
    realy umda likha he

    ReplyDelete
  3. zindagi hai paiso ka khel aur hum sab juaari hain

    ReplyDelete

इस पोस्ट पर कमेंट ज़रूर करे..
केवल नाम के साथ भी कमेंट किया जा सकता है..

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
My facebook ID:Sumit Tomar